เทคนิคการพยากรณ์อุปสงค์ ภาษาฮินดี เรียงความ เศรษฐศาสตร์

นี่คือบทความเกี่ยวกับ 'เทคนิคการพยากรณ์ความต้องการ' โดยเฉพาะอย่างยิ่งที่เขียนขึ้นสำหรับโรงเรียนและนักศึกษาในภาษาฮินดี

การเขียนเรียงความ # 1 การศึกษาระดับปริญญาตรี (การพยากรณ์ความต้องการของผลิตภัณฑ์ที่ก่อตั้งขึ้น):

विद्यमानवस्तुओंकेमाँगपूर्वानुमानकीनिम्नलिखितपद्धतियाँप्रचलित हैं।।

जैसाकिचार्टमेंदर्शायागयाहै:

(I) अनुभवआधारितअनुमानपद्धति (วิธีการคาดเดาตามประสบการณ์):

जबकोईव्यक्तिकुछउत्पादोंकेविक्रयप्रबन्धककेरूपमेंकार्यकरलेताहैतोउसेमाँगकेप्रभावितकरनेवालेनिर्धारकोंकानिकटसेअनुभवहोजाताहैऔरवहइसीअनुभवकेआधारपरभावीमाँगकाअनुमानलगामकताहैयद्यपिइसमेंवैज्ञानिकविश्लेषणकाअभाव การเรียนการสอนแบบเรียนรู้ภาษาอังกฤษ ंअधिकसहीउतरतेहैं

( II) सर्वेक्षण(िधि (วิธีการสำรวจ):

1. การสำรวจความคิดเห็นของผู้ซื้อ (แบบสำรวจ ความตั้งใจ ของผู้ซื้อ ):

अल्पकालमेंनाँगअनुमानितकरनेकीबधध्वीकाेासाेासा सदीक्रेताओंद्वाराभविष्यमेंमाँगीसाीमालीमालीकालामा

क्रेताओंकीइच्छाओंकासर्वेक्षणकरनेकेलिएनिम्नलिखितदोविधियाँप्रचलितระยะทาง:

(a) संगणनापद्धति (วิธีการสำรวจสำมะโนประชากร) तथा

(b) नमूनासर्वेक्षणपद्धति (ตัวอย่างวิธีการสำรวจ)

( a) संगणनापद्धति (วิธีสำรวจสำมะโนประชากร):

इसरीतिकेअन्तर्गतकम्पनीकेसर्वेक्षणभभीकाैदी यहविधिउससमयउपयुक्तहोतीहैजबकिक्रेताओंकीसंख्यासीमितहाबाहोहो

( b) नमूनासर्वेक्षणपद्धति (ตัวอย่างวิธีการสำรวจ):

जबवस्तुकाबाजारविस्तृतहोताहैऔरक्रेताओंकीसंख्याअधिकहोतीहैतोसभीकासाक्षात्कारकरनासम्भवनहींहोता, ऐसीस्थितिमेंनमूनेकेतौरपरकुछऐसेग्राहकोंसेपूछाजाताहैजोसभीग्राहकोंकाप्रतिनिधित्वकरतेहैंऔरउनकेआधारपरसम्पूर्णबाजार कीमाँगकापूर्वानुमानकियाजाताहै। การเรียนการสอนในโรงเรียนประถมศึกษา, การศึกษาและการสอน, การสอน, การฝึกอบรมและการสอนการสอนและการสอน

2. अन्तिमउपयोगपद्धति (วิธีการใช้ปลายทาง):

इसविधिकेअनुसारविचाराधीनवस्तुकामाूीवाोगावाोगावाहिंमी

อินพุทและเอาท์พุทแบบอินพุท यहाँध्यानदेनेयोग्यबातयहहैकिकोईमध्यवर्तीवस्तुअन्तिमउपयोगवस्तुभीहोसकतीहैऔरकिसीमध्यवर्तीवस्तुकीमाँगदेशीऔरविदेशीदोनोंबाजारोंमेंहोसकतीहै

Mer ( ข้อดี):

คำภาษาอังกฤษที่เริ่มต้นด้วยภาษาอังกฤษ:

(i) ไอเอฟเอสบีเอสเอ

(ii) सहअल्पकालीनपूर्वानुमानोंकेलिएसबसेसरलएवंउपयुक्तपद्धतंै

Dem ( Demerits):

คำภาษาอังกฤษที่เริ่มต้นด้วย:: े:::::::::::::::: तततततततततततततत::

(i) ไอเอฟเอสบีเอ

(ii) संगणनापद्धतिमेंसमय, शक्तिएवंकाधीुटव्रा, जबक्ाक्य

(iii) यहधाउाच्ोारी;होापी;ाोा;ाया;ासा;ासा;ासा;ासा;ासा;ासा;ा(ा;ह(ा;ाााiााiााiााข้อมูลเพิ่มเติม --से -, िज्ञापन, किस्मसुधारआदि।

Suitिधिकीउपयुक्तता ( ความเหมาะสมของวิธีการ):

ผู้ป่วยใน, ผู้ป่วยที่มีอาการเจ็บคอ, วัยกลางคน, ผู้ป่วยนอก,

(a) क्रेताओंकीसंख्यासीमितहो;

(b) क्रेताओंकेइरादेस्पष्टहों;

(c) वेअपनेइरादोंकोबतानेकेइच्छुकहों;

(d) अेअपनेइरादोंकेअनुरूपचलतेहोंतथा

(จ) साक्षात्कारकमखर्चीलाहोसामान्यतयायहविधिऔद्योगिकउत्पादनों, टिकाऊउपयोगवस्तुओंतथानयेउत्पादनोंकेप्रवेशकेपूर्वानुमानोंमेंउपयुक्तमानीजातीहै

3 . การรวมความคิดเห็นของพนักงานขายหรือความคิดเห็นแบบรวม (Collective Opinion-Force Opinion หรือ Collective Opinion Method):

जहाँक्रेताओंकेइरादेजाननाकठिनहोताहै, वहाँफर्मअपनीवस्तुओंकेविक्रयमेंसंलग्नविक्रयप्रतिनिधियोंवशाखाप्रबन्धकोंकोअपने-अपनेक्षेत्रोंयाविभागोंकेमाँगपूर्वानुमानतैयारकरनेकोकहतीहै

इसविधिकाऔचित्ययहहैकिग्राहकोंकेअधिकसेअधिकनिकटहोनेकेकारणविक्रयप्रतिनिधियोंकोबाजारकासबसेअच्छाअनुभवअथवाज्ञानहोताहैऔरवेबहुतअच्छीतरहसेयहबतासकतेहैंकिफर्मकीवस्तुओंकेप्रतिग्राहकोंकीप्रतिक्रियाएँक्याहैंतथा बिक्रीकीप्रवृत्तियाँक्याहैं?

इसविधिकेअन्तर्गतअलग-अलगविक्रयप्रतिनिधियोंकेअनुमानोंकाकीकिक्क ที่อยู่อาศัย

यहपुनर्निरीक्षणअनुमानकुछतत्वों; जैसे - विक्रयमूल्योंमेंपरिवर्तन, वस्तुकीडिजाइनोंमेंतथाविज्ञापनयोजनाओंमेंप्रस्तावितपरिवर्तन, प्रतियोगितामेंसम्भवपरिवर्तनतथादीर्घकालीनशक्तियों (जैसे - क्रयशक्ति, आयवितरण, बेरोजगारी) मेंपरिवर्तनआदिकोध्यानमेंरखकरकियाजाताहै

แม่ชีเด็ก, พ่อแม่ลูกอ่อนในครอบครัว, न्याशबाुाुाैाााुाााजााा

इसबिधिकोसामूहिकरायपद्धतिइसलिएकहतेहैंकिइसकेविक्रयप्रतिनिधियों, क्षेत्रीयएवंशाखाप्रबन्धकोंतथाविक्रयप्रबन्धकआदिकेअतिरिक्तकम्पनीकेप्रबन्धकीयअर्थशास्त्रीतथाउच्चकार्याधिकार (ผู้บริหารระดับสูง) कीसामूहिकरायकाउचितसम्मिश्रणएवंसमन्वयकरकेपूर्वानुमानकियाजाताहै

Staffसकेअतिरिक्तइसमेंविक्रयस्टाफ (เจ้าหน้าที่) सामूहिकरायकीप्रमुखताकेकारणस्टावपइ्क

लाभ ( ข้อดี):

(i) सहविधिसरलहोतीहैतथाइसमेंसांख्यिकीयविधियोंकाप्रयोग

(ii) सहहिधिनईवस्तुओंकेविक्रयकाअनुमानकरनेमेंबहुतहीसकतीहकीक การใช้งานที่หลากหลาย

(iii) अनुमानोंकोविक्रयप्रतिनिधियोंतथाअन्यव्यक्तियोंकेजोबिक्रीकरनेसेसीधेसम्बन्धितहों, प्राथमिकज्ञानकेआधारपरहीतैयारकियाजाताहै, अतःअनुमानअधिकसहीहोतेहैं

(iv) सहविधिअल्पकालीनमाँगपूर्वानुमानकेलिएउपयुक्तविधिहै।

Dem ( Demerits):

ฉัน

(ii) सहविधिकारणऔरपरिणामकाविश्लेषणनहींकरतीहअ, अतःइसमेंवैज्ञानिकताकाअभावहै

(iii) इसविधिकीउपयोगिताअल्पकालीनपूर्वानुमानुहहिंहीअर्थात्ऐीक

(iv) การเรียนรู้ด้วยตนเอง

4. ตัวชี้วัดทางเศรษฐกิจ (ตัวชี้วัดทางเศรษฐกิจหรือดัชนีวิธีการทางธุรกิจ): आर्थिकसंकेतांक

इसविधिकेअन्तर्गतपूर्वानुमानकेलिएकुछनिश्चितआर्थिकसूचकांक्रामांक्रामाकाकाकाहिंंा इसविधिकेअन्तर्गतजिनवस्तुओंकीमाँगकापूर्वानुमानलगानाहोताहै, उनकीमाँगकोप्रभावितकरनेवालेसम्बन्धितघटकोंकेआर्थिकसूचकांकोंकोएकत्रितकियाजाताहै

जैसे:

(a) उपभोक्तावस्तुओंकीमाँगकेलिएव्यक्तिगत(य (รายได้ส่วนบุคคล),

(b) निर्माणसामग्रीकीमाँग (--से - सीमेण्ट) ार, र्वानुमानकरनेकेलिएस्वीकृतनिर्माण

(c) เพิ่ม, ลดลง, เพิ่มขึ้น, ลดลง,

(d) कृषिसम्बन्धीआदाओं (ข้อมูลเข้า), जैसे -, ार, उर्वरक (ปุ๋ย) ที่ใช้ในการผลิต,

(e) रेडियो, पंखे, फर्नीचरआदिकेसम्बन्धमेंजनसंख्याकेसंकेतांकआदि येआर्थिकसूचकांकविशिष्टसंगठनोंद्वाराप्रकाशितकियेजातेहैं; ภาษาอังกฤษ - ภาษาอังกฤษ (CSO)

Mer ( ข้อดี):

(i) यहविधिसरल, स्पष्टऔरमितव्ययीहै।

(ii) तार्किकआधारहोनेकेकाकणपुर्वानुमानअधिकविक्वसनीयहोताहै।

Dem ( Demerits):

(i) वस्तुकीमाँगसेसम्बन्धितआर्थिकसंकेतककौा

(ii) नईवस्तुओंकेपूर्वानुमानकेलिएयहविधिअनुपयुक्तहोतीहैकेंहआँीकहिंछी

5. विExpertेषज्ञविचारविधि (Expert Opinion Method):

इसविधिकेअन्तर्गतफर्मसम्बन्धितक्षेत्रोंकेअपनेविशेषज्कंकेपू्

इसकेअन्तर्गतूू्वानुमानदोप्रकारसेकियेजातेहैं :

(a) सरलविधि

(b) डेल्फीविधि।

( a) सरलविधि:

सरलविधिकेअन्तर्गतविभिन्नविशेषज्ञोंकेद्वारादियेगयेगोपनीयपूर्वानुमानसंख्याओंकासरलयाभारितऔसतनिकालाजाताहैऔरअपनेसुविचारितनिर्णयसेपरखकरआवश्यकपूर्वानुमानपरपहुँचादियाजाताहै

( b) डेल्फीतकनीक (Delphi Technique):

विकसितदेशोंमेंव्यावसायिकफर्मेंप्रायःअलग-अलगस्रोतोंसेकिसीवस्तुकीमाँगकेपूर्वानुमानोंकीविश्वसनीयताकोबढ़ानेहेतुडेल्फीतकनीककाआश्रयलेतीहैं इसतकनीककेअनुसारविभिन्नव्यक्तियोंकेपैनलसेप्राप्तपूर्वानुमानोंमेंबहुतअधिकअन्तरहोनेपरउन्हेंतबतकइनमेंसंशोधनकरनेकोकहाजाताहैजबतककियेअन्तरन्यूनतमनहींहोजाते

उदाहरणकेलिए, चारव्यक्तियोंकेएकपैै्वारव्वाकाँचार्यारावाहाणाहावाहाहाहाहाशःाहाशःाहाशःाहाउदाहाउदाहाेाहाउदाहाउदाहाणाहाेाहाणाहाणाहाणाहरउदकेहएा्บุคคลที่มีชื่อเสียง अबोोोोवोोोअअअअअअअवअअअअअअअययय

कल्पनाकीजिएअब, येमवानुमान 50 หน่วย, 30 หน่วยกิต, 40 หน่วยกิต 35 प्रतिशतवृद्शातेतं इसीप्रकारतीसरीबारसमीक्षाकरनेपरसंशोधितपूर्वानुमान 48 प्रतिशत, ๔, ๔

चूँकिप्राप्तपूर्वानुमानोंमेंअबकाफीनिकटताआचुकीहोतीहै, इनकाऔसतलेकरअगलेपाँचवर्षोंमेंकपड़ेकीमाँगमेंहोनेवालीवृद्धिकालगभगसहीपूर्वानुमानकियाजासकताहै

परन्तुडेल्फीतकनीकअपेक्षाकृतमँगँगीैैल्ारोाेीबालाराडा-ाडा-ालारालारालाराला-ाला-ालाहिं-ीपाल्याकบุคคลผู้มีหน้าที่จัดการ

6. बाMarketारपरीक्षणपद्धति (วิธีการทดสอบตลาด):

बड़ी-बड़ीव्यापारिकफर्मोंमेंअपनेसांख्यकीयएवंशोधविभागहोतेहैंऔरउसमेंकार्यरतव्यक्तिबाजारसर्वेक्षणएवंसूचनाओंकेविश्लेषणकेद्वाराभावीमाँगकापूर्वानुमानलगातेहैं

नसकेनिम्नलिखितदोरूपहैं:

( a) वास्तविकबाजारपरीक्षणविधि (วิธีการทดสอบตลาดจริง):

इसविधिकेअन्तर्गतफर्मसर्वप्रथम, ประเทศอินเดีย ภาษาอังกฤษ ผู้สูงอายุ, ผู้สูงอายุ, ผู้ป่วยใน, ผู้ป่วยที่ไม่ได้รับการรักษาด้วยยาเสพติด

( b) बाMarketारSimulationनुरूपणधिधिपद्धति (วิธีจำลองตลาด):

ภาษาอังกฤษ उन्हेंमुद्राभीदीजातीहै। जिसेवेखर्चकरसकतेहैंयाअपनेपासरखसकतेहैं।

परीक्षणकेदौरानविभिन्नवस्तुओंकीकीमतेंउनकीपैकेजिंग, गुणवत्ताआदिपरिवर्तितकियेजातेहैं, ताकिइनपरिवर्तनोंकेफलस्वरूपउपभोक्ताओंकीप्रतिक्रियाओंकाअवलोकनकियाजासके इसतरहसेप्राप्तसशनानिश्चयहीपूर्वानुमानकेलिएसन्तोषप्रदहोगी

ผม. इसपद्धतिमेंमाँगकागहनविश्लेषणकरनेकाअवसरमिलताहै

ii การใช้งานที่หลากหลาย

Dem ( Demerits):

(i) प्रतिदर्श (सेम्पल) पर्याप्तूूूस्थाथााभाभिकिन्राहिं्ा अन्यशब्दोंमें, थोड़े-सेउपभोक्ताओंसेआँकड़ेएकत्रितकरनेसेअर्थनिष्करं

(ii) सर्वेक्षणकरनेवालेव्यक्तिनिष्पक्षएवंकार्यमेंनिपुणहों।

(iii) वस्तुकीस्थानापन्नवस्तुओंकीकीमतोंतथावर्तमानवप्रस्ताविकारभा्ीूकआँर्तिकार

(iv) การเรียนการสอนแบบเรียน ผู้ให้บริการอินเทอร์เน็ต

(III) सांख्यिकीयविधि (วิธีการทางสถิติ):

सांख्यिकीयविधिकेअन्तर्गतअर्थमितिमॉडलकेमाध्यमसेपिछलाअनुभवअर्थात्ऐतिहासिकआँकड़ोंकाविश्लेषणकियाजाताहैऔरउसकेआधारपरमाँगपूर्वानुमानकियेजातेहैं

इसकेअन्तर्गतमुख्यविधियाँनिम्नहैं:

1. การ วิเคราะห์ทางสถิติ (การ วิเคราะห์ทางสถิติของข้อมูลประวัติศาสตร์):

ที่อยู่อาศัย งานอดิเรกของฉัน

इसविधिमेंयहमान्यतालीीातीहैकिफर्मकामाँगफलनअर्थात् ผู้ให้บริการด้านความปลอดภัย

1 ปีที่ผ่านมา:

(i) सिभिन्नसमयावधियोंमेंमाँगवक्र DD 1 ปีที่ผ่านมา

(ii) सहलीसमयावधिमेंपूर्तिकेलिए S 1 3 क्रखींचागयंहैियी, 2 स्यावधिकेरीकिकािकाकिक्रारारीहिंरी

(iii) จำนวน 1 ครั้งที่มีอยู่สำหรับ A, B, C คำตอบสำหรับคำถามที่ถามบ่อยๆ, ित्र

(iv) यदि हमें फर्म के सम्बन्ध में A, B और C बिन्दुओं के सम्बन्ध में जानकारी हो परन्तु उस वस्तु से सम्बन्धित व पूर्ति के बारे में ज्ञान न भी हो तो हम इस मान्यता के आधार पर कि फर्म का माँग फलन यथा स्थिर रहता है, A, B और C बिन्दुओं की सूचना के आधार पर माँग वक्र का निर्माण कर सकते हैं ।

(v) यदि यह मान लिया जाये कि फर्म के उत्पाद के माँग की प्रवृत्ति अपरिवर्तित बनी रहती है तो हम उत्पाद की भावी माँग का पूर्वानुमान कर सकते हैं ।

2. प्रवृत्ति या उपनति प्रक्षेपण विधि (Trend Projection Method):

व्यावसायिक जगत में समय के साथ-साथ परिवर्तन की स्वाभाविक प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होती है । अतः किसी वस्तु की माँग की प्रवृत्ति का अध्ययन समय श्रेणी के आधार पर किया जा सकता है । अतः उपनति प्रक्षेपण इस बात को व्यक्त करता है कि लम्बे समय में वस्तु की माँग में किस प्रकार का परिवर्तन होता है ।

उपनति प्रक्षेपण की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

(i) समय के किसी माप (जैसे-वर्ष, माह, दिन) के आधार पर प्रस्तुत समंकों के व्यवस्थित क्रम की श्रेणी समय श्रेणी (Time Series) अथवा ऐतिहासिक चल मूल्य (Historical Variables) कहलाती है ।

(ii) समय श्रेणी के अन्तर्गत स्वतन्त्र चल मूल्य (Independent Variables) समय के प्रतीक होते हैं तथा आश्रित चल मूल्य (Dependent Variables) समंकों पर समय के साथ-साथ होने वाले परिवर्तनों के प्रभावों को प्रस्तुत करते हैं ।

(iii) उपनति प्रक्षेपण में समय श्रेणी के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि यदि माँग की प्रवृत्ति भूतकाल जैसी रहे तथा अन्य परिस्थितियाँ सामान्य रहें तो वस्तु की आगामी वर्ष या वर्षों में कितनी माँग होगी?

(iv) माँग पूर्वानुमान में उपनति या प्रवृत्ति (Trend) ज्ञात करना बहुत महत्वपूर्ण है । दीर्घकालीन प्रवृत्ति या उपनति ज्ञात करने के लिए अनेक रीतियों, जैसे –स्वतन्त्र हस्त वक्र रीति (Free Hand Curve Method), अर्द्धमध्यक (Semi-Average Method), न्यूनतम वर्ग रीति (Method of Least Squares) आदि प्रयोग की जाती हैं किन्तु इन समस्त रीतियों में न्यूनतम वर्ग रीति श्रेष्ठ है ।

न्यूनतम वर्ग विधि ( Least Squares Method):

न्यूनतम वर्ग विधि से एक ऐसे समीकरण का निर्माण किया जाता है जिसकी सहायता से एक सरल रेखा खींची जा सकती है जिसे बेस्ट फिट की सरल रेखा (Line of Best Fit) का नाम दिया जाता है ।

इस प्रकार की सरल रेखा निम्न समीकरण की सहायता से खींची जा सकती है:

Y = a + bX

जहाँ पर ,

Y = पूर्वानुमान मूल्य

a = स्थिर मूल्य

b = दीर्घकालिक प्रवृत्ति का अर्थात् विकास की दर

X = समय की इकाई को व्यक्त करता है ।

इस विधि की गणना निम्न प्रकार से की जाती है :

ผม. एक निश्चित समय से श्रेणी के प्रत्येक समय का काल विचलन (X) निकालना और उसका योग (ΣX) ज्ञात करना ।

ii काल-विचलनों के वर्ग (X2) निकालना और उसका योग (ΣX2) ज्ञात करना ।

สาม. पदों और काल-विचलनों के गुणनफल (XY) निकालना और उसका योग (ΣXY) ज्ञात करना ।

iv उत्पत्ति ज्ञात करने के लिए a (Constant Variables) और b (Rate of Growth) के मूल्य ज्ञान करना क्योंकि उपनति a + bX के बराबर होती है ।

माप की वैकल्पिक विधियाँ:

न्यूनतम वर्ग विधि द्वारा उपनति का माप निम्न दो विधियों से किया जाता है:

I. प्रत्यक्ष विधि:

(a) यदि पदों की संख्या विषम हो एवं

(b) यदि पदों की संख्या सम हो

ครั้งที่สอง अप्रत्यक्ष या लघु विधि.

I. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method):

इस विधि में उपनति a + bX ज्ञात करने के लिए a और b का मूल्य क्रमशः

एवं

के बराबर होता है । यह उल्लेखनीय है कि इस विधि का प्रयोग केवल वहीं किया जा सकता है जहाँ समय-विचलनों का योग शून्य (ΣX = 0) हो ।

(a) यदि पदों की संख्या विषम हो:

यदि पदों की संख्या विषम (Odd) हो, दिये हुए समयों का अन्तर समान हो तो मध्य समय को आधार मानकर विचलन निकालने पर विचलनों का योग शून्य होगा ।

उदाहरण 1:

अगले पाँच वर्षों के लिए बिक्री की प्रवृत्ति का अनुमान लगाइये (Project the trend of sales for the next five year):

( b) यदि पदों की संख्या सम (Even) हो:

पदों की संख्या के सम होने पर भी प्रत्यक्ष विधि का प्रयोग किया जा सकता है । इसके लिए सम संख्या के मध्य के वर्ष से विचलन ज्ञात किये जा सकते हैं ।

इसे निम्न उदाहरण से स्पष्ट किया जा सकता है:

उदाहरण 2:

निम्नांकित आँकड़ों की सहायता से अगले पाँच वर्षों की बिक्री की प्रवृत्ति का अनुमान कीजिए ( With the help of the following data, project the trend of sales for the next five year):

ครั้งที่สอง अप्रत्यक्ष या लघु विधि (Indirect or Short Cut Method):

विचलनों का योग सर्वदा शून्य नहीं होता । यदि श्रेणी के विाभिन्न समयों का अन्तर समान न हो, अन्तर समान होने पर मध्य समय से विचलन न निकाले जायें तो विचलनों का योग्य शून्य नहीं होगा । ऐसी परिस्थिति में प्रत्यक्ष विधि का प्रयोग नहीं किया जा सकता वरन् अप्रत्यक्ष विधि से उपनति ज्ञात की जायेगी ।

अप्रत्यक्ष विधि का प्रयोग उस दशा में ही किया जाना चाहिए जबकि (Σx = 0) हो किन्तु गणना की दृष्टि से अप्रत्यक्ष विधि का प्रयोग उस दशा में ही किया जाना चाहिए जबकि Σx = 0 न हो ।

अप्रत्यक्ष विधि में उपनति में a + bx ज्ञात करने के लिए a और b का मूल्य निम्न युग्म समीकरणों को हल करके ज्ञात होगा:

Σ y = na + b Σ x

Σ xy = Σ x + b Σ x 2

उदाहरण 3:

अगले पाँच वर्षों के लिए बिक्री की प्रवृत्ति का अनुमान लगाइए ( Project the trend of sales for the next five year):

उपयुक्त समीकरण का प्रयोग आगामी 5 वर्षों में विक्रय उपनति का मूल्य (Trend Values) मालूम करने के लिए करेंगे ।

सर्वप्रथम हम 1989 से 1993 तक का उपनति मूल्य निकालेंगे:

अब हम आगामी 5 वर्षों का उपनति का विक्रय मूल्य ज्ञात करेंगे:

उदाहरण 4:

निम्नांकित आँकड़ों की सहायता से छः वर्षों में से प्रत्येक की बिक्री की प्रवृत्ति का अनुमान लगाइए ( With the help of the following data, project the trend of sales for the each of the six years):

उपनति प्रक्षेपण पद्धति के गुण:

(i) यह पद्धति भूतकालीन वास्तविक विक्रय समंकों पर आधारित है, समंकों के संकलन का व्यय बच जाता है और आँकड़े विश्वसनीय होते हैं ।

(ii) यदि माँग को प्रभावित करने वाले तत्व स्थिर रहें तथा विकास या वृद्धि दर के भविष्य में बनी रहने की सम्भावना हो, तो अनुमान सत्यता के निकट होते हैं ।

दोष:

(i) इस पद्धति के द्वारा पूर्वानुमान भ्रामक होते हैं यदि माँग को प्रभावित करने वाले घटकों में परिवर्तन हो जाता है ।

(ii) नये उपक्रम में जहाँ विक्रय अभी शुरू नहीं हुआ इस पद्धति का उपयोग नहीं किया जा सकता है ।

(iii) इस प्रकार की पद्धति में गणितीय और सांख्यिकीय पद्धतियों का अधिक प्रयोग किया जाता है जिसे साधारण व्यक्ति प्रयोग में नहीं ला सकते हैं ।

ग्राफ पेपर के द्वारा माँग पूर्वानुमान ( Demand Forecast on Graph Paper):

माँग पूर्वानुमान ग्राफ पेपर के द्वारा भी किया जा सकता है । इसके लिए सर्वप्रथम न्यूनतम वर्ग रीति के द्वारा उपनति या प्रवृत्ति (Trend) ज्ञात की जाती है । इन उपनति मूल्यों (xy) को ग्राफ पेपर पर अंकित किया जाता है ।

इन बिन्दुओं को मिलाने से एक सरल रेखा प्राप्त होती है । इस रेखा को आगे बढ़ाकर भविष्य के लिए माँग पूर्वानुमान करते हैं । माँग पूर्वानुमान करने के लिए जिस वर्ष का अनुमान करना है, उस वर्ष (X-अक्ष) से लम्ब डाला जाता है । Y-अक्ष के इस बिन्दु का मान माँग पूर्वानुमान मूल्य होता है ।

ग्राफ पेपर द्वारा माँग पूर्वानुमान को हम निम्नांकित उदाहरण द्वारा अधिक अच्छे ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं:

उदाहरण 5:

ABC फर्म के कुछ वर्षों के उत्पादन समंक के साथ ग्राफ पेपर पर प्रदर्शित की जिए (The following are the production figures of ABC firm for the years shown below. Fit a straight line trend of these figures and plots on the graph the actual figures together with trend values):

उपरोक्त प्रवृत्ति रेखा को ग्राफ पेपर पर निम्न तरीके से प्रदर्शित किया गया है:

इस ग्राफ में प्रवृत्ति दर को एक सरल रेखा द्वारा दिखाया गया है । सरल रेखा को देखने से ज्ञात हो रहा है कि प्रवृत्ति दर में वृद्धि हो रही है क्योंकि यह रेखा ऊपर की ओर जा रही है ।

3. बैरोमैट्रिक विधि (Barometric Method):

इस विधि के अन्तर्गत माँग का पूर्वानुमान करने वाला (या संस्था) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यावसायिक जगत में होने वाले परिवर्तनों की स्वयं समीक्षा करता है । प्रायः यह व्यक्ति पर्याप्त रूप से अनुभवी एवं विश्वसनीय होता है तथा गम्भीर स्पष्ट से सभी घटकों का विश्लेषण करके किसी वस्तु की माँग में आगामी 5 या 10 वर्षों में होने वाली (प्रत्याशित) वृद्धि का अनुमान करता है ।

सरकारी नीतियों तथा निवेशकों के मूड, यानी शेयर बाजार की गतिविधियाँ से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करने में वह सिद्धहस्त होता है । इन सबके आधार पर यह निर्दिष्ट वस्तु की भावी माँग के विषय में संकेत देता है ।

बैरोमैट्रिक विधि इस मान्यता पर आधारित है कि वर्तमान के कुछ आर्थिक और सांख्यिकीय संकेतों का उपयोग भविष्य में परिवर्तन की दशाओं के पूर्वानुमान के लिए किया जा सकता है ।

ये आर्थिक और सांख्यिकीय संकेतक अग्रलिखित हैं:

( a) आर्थिक संकेतक (Economic Indicator):

बैरोमैट्रिक विधि के आर्थिक संकेतक निम्नलिखित हैं:

ผม. प्रमुख संकेतक (Leading Indicator):

प्रमुख संकेतक वह चर है जो उस चर के भविष्यकालीन व्यवहार से सहसम्बन्धित है जिसके लिए पूर्वानुमान किया जाना है । उदाहरणार्थ, भवन निर्माण सामग्रियों के माँग पूर्वानुमान के लिए स्वीकृत भवन-निर्माण संविदाओं की संख्या प्रमुख संकेतक होगा ।

ii पीछे रहने वाले संकेतक (Lagging Indicator):

ये संकेतक प्रमुख संकेतकों की गतिविधि के उपरान्त आगे या पीछे चलते हैं । उदाहरणार्थ, अल्पकालीन व्यवसाय ऋणों पर बैंक दर ।

สาม. अनुरूप संकेतक (Coincident Indicator):

ये संकेतक प्रमुख संकेतकों की गतिविधि के अनुसार साथ-साथ बढ़ते हैं और घटते हैं; जैसे – व्यक्तिगत आय ।

( b) सांख्यिक संकेतक (Statistical Indicator):

ผม. प्रसार सूचक (Diffusion Indexes):

प्रसार सूचक उत्पादन या उपभोक्ता जैसे विशेष वर्ग में चुनिन्दा आर्थिक काल श्रेणियों की दशा और तीव्रता को दर्शाती है ।

ii समिश्र सूचक (Composite Indexes):

सम्मिश्र सूचक कई चुनिन्दा एकल संकेतकों का प्रभावित औसत होता है ।

4. अर्थमितीय विधि (Econometric Method):

अर्थमितीय विधि के अन्तर्गत हम सांख्यिकी, गणित तथा आर्थिक सिद्धान्तों को संयुक्त रूप से एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करते हैं । इसमें केवल प्रवृत्ति का ही विश्लेषण न करके विभिन्न चरों के पारस्परिक सम्बन्धों की भी व्याख्या की जाती है ।

इन सम्बन्धों को देखते हुए निर्णय कर्त्ता माँग के भावी स्तर का अनुमान अधिक सही रूप में कर सकता है । प्रायः अर्थमितीय रूप में माँग का पूर्वानुमान करने हेतु चार परस्पर सम्बन्ध सोपान जरूरी हैं ।

जो निम्न है:

(i) एक सैद्धान्तिक मॉडल का निरूपण,

(ii) आँकड़ों का संकलन,

(iii) निरूपित किये जाने वाले समीकरण के फलनिक स्वरूप का चयन तथा

(iv) प्राप्त निष्कर्षों का विश्लेषण एवं व्याख्या करना ।

गुण ( Merits):

(a) इस पद्धति के द्वारा लगाये गये पूर्वानुमान अधिक तार्किक एवं विश्वसनीय होते हैं ।

(b) माँग से सम्बन्धित और उसे प्रभावित करने वाले सभी कार्यात्मक एवं आकस्मिक चरों का समावेश होने से यह पद्धति अधिक वैज्ञानिक है ।

(c) जटिल समीकरणों को हल करने में कम्प्यूटरों का प्रयोग शुद्धता को जन्म देता है ।

दोष ( Demerits):

(a) यह पद्धति जटिल है, अतः सर्वसाधारण की समझ से बाहर है ।

(b) यह पद्धति अत्यन्त खर्चीली है, अतः छोटे व्यवसायी इसका उपयोग नहीं कर सकते ।

Essay # 2. नई वस्तुओं का माँग पूर्वानुमान (Demand Forecasting of a New Product):

पुरानी वस्तुओं और सेवाओं की माँग का पूर्वानुमान लगाने के लिए पिछले वर्षों के अनुभवों, सूचनाओं और वास्तविक विक्रय समंकों की सहायता ली जा सकती है तथा न्यूनतम वर्ग पद्धति के द्वारा उपनति प्रक्षेपण ज्ञात कर भावी माँग (विक्रय) पूर्वानुमान लगाना सम्भव हो जाता है किन्तु नसे उत्पाद के सम्बन्ध में ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं । अतः नई वस्तुओं के पूर्वानुमान का कार्य कठिन होता है ।

एक नये उत्पाद की माँग का पूर्वानुमान लगाने की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:

A. विकासात्मक धारणा (Evolutionary Approach):

विकासात्मक धारणा यह मानकर चलती है कि नवीन वस्तु वर्तमान पुरानी वस्तु का विकसित रूप है । अतः इस धारणा के अनुसार नवीन वस्तु का माँग पूर्वानुमान करते समय पुरानी वस्तु की चालू माँग दशाओं पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए ।

उदाहरण के लिए, यदि रंगीन टेलीविजन नई वस्तु है और उसकी माँग बढ़ती है, तो इसका अर्थ यह होगा कि काले व सफेद टेलीविजन की माँग घटेगी ।

यह विधि तभी उपयोगी हो सकती है जबकि नया उत्पाद किसी विद्यमान उत्पाद का इतना निकट विकल्प हो कि इसे उसका एक सुधरा रूप ही माना जाये ।

B. स्थानापन्न विधि (Substitute Approach):

इस विधि के अनुसार माँग पूर्वानुमान के लिए सर्वप्रथम यह पता लगाया जाता है कि हमारा नया उत्पाद किस प्रचलित उत्पाद अथवा उत्पादों का स्थानापन्न बनेगा । इसके पश्चात् अपने नये उत्पाद के गुण व मूल्य की अन्य प्रतियोगी उत्पादों से तुलना करते हुए नये उत्पाद के सम्भावित माँग का पूर्वानुमान लगाया जाता है । उदाहरणार्थ, हम बाल प्वाइन्ट पेन की विक्रय सम्भावना के आधार फाउण्टेन पेन की माँग का पूर्वानुमान लगा सकते हैं ।

C. मतदान प्रणाली (Opinion Polling Method):

इस विधि के अन्तर्गत नये उत्पाद के सम्भावित क्रेताओं से व्यक्तिगत सम्बन्ध स्थापित किया जाता है और उन्हें उत्पाद का नमूना दिखाकर और उसके सम्बन्ध में अन्य जानकारियाँ उपलब्ध कराकर क्रेताओं की राय और पसन्दगी के आधार पर नये उत्पाद की माँग का पूर्वानुमान लगाया जाता है और उसके पश्चात् प्रदर्शित किये गये नमूने के आधार पर ही प्रक्षेपित माँग के अनुसार वस्तु का उत्पादन किया जाता है ।

इस विधि का अधिकांशतः प्रयोग नये इंजीनियरिंग के समान और मशीनों के माँग पूर्वानुमान के लिए किया जाता है ।

D. विकास वक्र विधि ( Growth Curve Method):

इस विधि के अन्तर्गत प्रचलित उत्पादों की विकास की दर के आधार पर नये उत्पाद की विकास दर और माँग के अन्तिम स्तर का पूर्वानुमान लगाया जाता है उदाहरणार्थ, बाजार में प्रति व्यक्ति सभी घरेलू उपकरणों के विकास वक्रों के आधार पर हम किसी एक नये घरेलू उपकरण के बाजार की उपस्थिति का पूर्वानुमान लगा सकते हैं ।

इस विधि का उपयोग नये वायु मार्ग अथवा नये बस मार्ग के सम्भावित विकास के पूर्वानुमान के लिए किया जाता है ।

E. विशेषज्ञों की राय की विधि अथवा उत्तरदायित्व विधि (Experts Opinion Approach or Various Approach):

इस विधि के अन्तर्गत नये उत्पाद की माँग पूर्वानुमान के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाती है ।

विशेषज्ञों की सलाह तीन तरीकों से प्राप्त की जा सकती है जो निम्नलिखित हैं:

( a) व्यक्तिगत अन्तर्दृष्टि ( Person Insight):

इस विधि के अन्तर्गत किसी ऐसे विशेषज्ञ की सलाह ली जाती है जो कि निजी अनुभवों और अध्ययनों के आधार पर फर्म के लिए भावी अनुमान प्रस्तुत करता है ।

( b) पैनेल की सहमति (Panel Consensus):

दूसरी विधि यह है कि फर्म एक व्यक्ति के अनुभवों तथा अध्ययनों की अपेक्षा विशेषज्ञों की समिति का गठन कर सकती है । इस समिति से यह अपेक्षा की जा सकती है कि इससे जुड़े विभिन्न व्यक्ति और सामूहिक अनुभवों तथा अध्ययनों को आपस में बाँटकर ऐसे पूर्वानुमान प्रस्तुत कर सकेंगे जो कि वास्तविकता के अधिक करीब हैं ।

( c) डेल्फी विधि (Delphi Method):

इस विधि के अनुसार भी:

ผม. विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाता है ।

ii परन्तु समिति के सदस्यों में आपस में सीधा सम्पर्क नहीं होता ।

สาม. नये उत्पाद की माँग से सम्बन्धित एक प्रश्नावली तैयार की जाती है और प्रत्येक सदस्य को उस प्रश्नावली के आधार पर अपने पूर्वानुमान लगाने के लिए कहा जाता है ।

iv सदस्यों से प्राप्त उत्तरों को एक अन्य समिति को सौंप दिया जाता है जो कि इनका मूल्यांकन करती है ।

v. इन पूर्वानमानों को पुनः मूल समिति को सौंपा जाता है जो कि अन्तिम पूर्वानुमान तैयार करती है ।

F. बाजार परीक्षण की विधि अथवा विक्रय अनुभव की विधि (Market Test Approach or Sales Experience Approach):

इस विधि के अन्तर्गत नये उत्पाद को परीक्षण के तौर पर बाजार के किसी भाग में प्रत्यक्ष रूप से अथवा किसी सुपर बाजार या शृंखला विभाग (Chain Store) के माध्यम से कुछ समय के लिए बेचा जाता है और उसके प्राप्त परिणामों के आधार पर सम्पूर्ण बाजार के लिए पूरे वर्ष की माँग का पूर्वानुमान लगाया जाता है ।

G. जीवन चक्र खण्डीकरण विश्लेषण (Life Cycle Segmentation Analysis):

जीवन चक्र खण्डीकरण विश्लेषण वस्तु का जीवन चक्र दर्शाता है । नवीन वस्तुओं की माँग का पूर्वानुमान करने के लिए इस विश्लेषण का भी उपयोग किया जाता है ।

जीवन चक्र खण्डीकरण विश्लेषण के अनुसार वस्तु का एक जीवन चक्र होता है, अतः वस्तु की माँग का अनुमान लगाने के लिए यह जानना अत्यधिक आवश्यक होता है कि कोई वस्तु जीवन चक्र की किस विशेष अवस्था में कब होगी, उसके अनुरूप ही माँग का पूर्वानुमान किया जाता है । इसलिए वस्तु की विभिन्न अवस्थाओं के अनुरूप ही माँग पूर्वानुमान की अलग-अलग विधियाँ अपनायी जाती हैं ।

वस्तु के जीवन चक्र की निम्नलिखित पाँच अवस्थाएँ होती हैं:

ผม. प्रारम्भिक अवस्था (Introducing Stage):

वस्तु के जीवन चक्र की अवस्था में वस्तु की गुणवत्ता का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है, उसके उपरान्त विज्ञापन व प्रचार का स्थान आता है । इस अवस्था में कीमतों और सेवाओं का प्रभाव बहुत कम होता है, अतः वस्तु के जीवन चक्र की प्रथम अवस्था में अधिक विक्रय के लिए श्रेष्ठगुणवत्ता वाली वस्तुओं पर ही विशेष जोर दिया जाना चाहिए ।

ii विकास अवस्था (Growth Stage):

इस अवस्था में विज्ञापन और प्रचार जैसे बिक्री बढ़ाने वाले प्रयासों का प्रबल प्रभाव होता है ।

สาม. परिपक्वता अवस्था (Maturity Stage):

इस अवस्था में गुणवत्ता, विज्ञापन और सेवा की अपेक्षा कीमत अधिक महत्वपूर्ण होती है जबकि बाजार में प्रतियोगी प्रवेश कर चुके होते हैं । अतः अब कीमत लोचक होती है ।

iv चरम सीमा अवस्था (Saturation Stage):

इस अवस्था के अन्तर्गत गुणवत्ता में वस्तु विभेदकरण, विज्ञापन, पैकेजिंग अधिक महत्वपूर्ण होते हैं । कारण यह है कि कीमत पहले ही कम हो चुकी होती है इसलिए कीमत अधिक महत्वपूर्ण नहीं होती है ।

v. ह्रास अवस्था (Decline Stage):

इस अवस्था में वस्तु का नवीन उपयोग, विज्ञापन आदि का विशेष महत्व होता है । यहाँ कीमत, गुणवत्ता और सेवा का कम महत्व हो जाता है ।

इस प्रकार वस्तु के जीवन चक्र की उपयुक्त अवस्थाएँ होती हैं जिन्हें चित्र 3 में दर्शाया गया है । चित्र में OX-अक्ष पर समय और OY-अक्ष पर बिक्री दर्शायी गई है और SS बिक्री वक्र से स्पष्ट है कि प्रथम और द्वितीय अवस्था में वस्तु की बिक्री तीव्र गति से बढ़ती है ।

तीसरी अवस्था में यद्यपि वस्तु की बिक्री बढ़ती है परन्तु बढ़ने की गति अपेक्षाकृत धीमी होती है । A और B बिन्दुओं के बीच वस्तु की बिक्री लगभग स्थिर रहती है परन्तु B बिन्दु के बाद वस्तु की बिक्री में गिरावट शुरू हो जाती है ।

जीवन चक्र खण्डीकरण चक्र विश्लेषण माँग पूर्वानुमान के लिए एक उपयोगी विधि है ।

निष्कर्ष:

नवीन वस्तुओं की माँग पूर्वानुमान की विभिन्न विधियाँ आपस में निरपेक्ष नहीं है बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं । प्रायः इनमें से कई विधियों का संयोग पूरक के रूप में आवश्यक हो जाता है, ताकि क्रॉस परीक्षण (Cross Checking) किया जा सके ।

जैसा कि प्रो. जोल डीन ने कहा है, ”उनमें से कई का संयोग प्रायः वांछनीय होता है ताकि वे एक-दूसरे के पूरक हो सकें ।” इसके अतिरिक्त नवीन वस्तुओं की माँग, पूर्वानुमान के लिए स्थापित वस्तुओं की माँग तथा पूर्वानुमान विधियों का भी प्रयोग किया जा सकता है ।

 

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